बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे

बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे
वो लड़ती है , झगड़ती है ,
मनाने जाऊं तो रूठ जाती है,
फिर रुसवा होकर कहती है ,
मुझे नही है प्यार तूुझसे,
कोई एहमियत नही तेरी मेरे जीवन मे,
और मैं ;बस चुपचाप सुन लेता हूं,
की कैसे बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे |

वो हँसती है,
मुस्कुराती है,
फिर कभी कभी चुप बैठ जाती है,
जब पूछता हूं ; क्या हुआ ?
वो कहती है , कुछ नही,
वो समझती है झूठ बोलके सच छुपा लेगी मुझसे,
पर चेहरा बयान कर देता है उसका,
की बहुत सच्चाई से झूठ बोलती है वो मुझसे |

मैं जानता हूं कि वो जानती है,
की न वो चाँद है मेरे रात की
जो रात को ही साथ निभाये
न सूर्य है सहर का,
जो साँझ को ढल जाए,
वो तो आसमान है मेरा
जो जानती है कब है उजियारा मेरे जीवन मे,
और कब अंधेरा,
मैं फिर भी कहता हूँ बहुत बुरी है तू ज़िन्दगी
और मुस्कुरा के वो जवाब देती है
बहुत सचाई से झूठ बोल लेते हो तुम मुझसे।

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बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे

इसी पल है ज़िन्दगी …

सभी खुशियां सभी गम ,
कभी धूप कभी छांव ,
कभी पतझड़ कभी सावन .
जीवन का हर रंग ,
जीवन का हर ढंग ,
देखना है ; जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

कल तो कभी देखा नहीं ,
कल तो कभी आया नहीं ,
गर कोई ख्वाइश है ,
गर कोई आज़माइश है ,
सभी अरमानो का अंत ,
सभी ख्वाईशो का प्रारम्भ ,
इसी पल है ; क्यूंकि इसी पल है ज़िन्दगी .

 

याद कर रहा बीती बातें ,
गुज़र रही इस पल की सौगातें,
कल यह भी बन जाएँगी यादें ,
इसलिए जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

इसी पल है ज़िन्दगी …