कहाँ रहता है खुदा

 

जिस दिल में गूंजता है प्रेम का गीत ;
उस गीत का संगीत हूँ मैं .

गर समझता है खुद को तन्हा;
तो उसका भी मीत हूँ मैं ,

अन्धकार में प्रकाश ;
तो रात्रि का अंधकार हूँ मैं ,

बसंत में खिलती कलि ;
तो पतझड़ में गिरता फूल हूँ मैं ,

गर देखना चाहे मुझे ,
तो तुझमे ही हूँ मैं .

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कहाँ रहता है खुदा

इसी पल है ज़िन्दगी …

सभी खुशियां सभी गम ,
कभी धूप कभी छांव ,
कभी पतझड़ कभी सावन .
जीवन का हर रंग ,
जीवन का हर ढंग ,
देखना है ; जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

कल तो कभी देखा नहीं ,
कल तो कभी आया नहीं ,
गर कोई ख्वाइश है ,
गर कोई आज़माइश है ,
सभी अरमानो का अंत ,
सभी ख्वाईशो का प्रारम्भ ,
इसी पल है ; क्यूंकि इसी पल है ज़िन्दगी .

 

याद कर रहा बीती बातें ,
गुज़र रही इस पल की सौगातें,
कल यह भी बन जाएँगी यादें ,
इसलिए जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

इसी पल है ज़िन्दगी …