तेरी मुस्कान.

अश्कों से भीगी जिंदगी ,

पल भर में सूख जाती है ,

जब तू मुस्कुराती है.

 

लफ़्ज़ों के बिना भी ,

कह देती है हर दास्ताँ ,

कुछ ऐसी जुबान है तेरी मुस्कान.

 

था गुरुर चाँद को ,

की रोशन है उससे आसमान ,

अब  छुप गया  है ,

बादलों के पीछे ,

देख के तेरी मुस्कान .

 

बरसता सावन बुझा रहा है,

प्यास सारे जहाँ की ,

और प्यासे सावन पर,

बरस रही है तेरी मुस्कान .

 

जगमगाता है आसमान ,

जैसे सितारों   से ,

है यही दुआ खुदा से ,

सदा वैसी रहे तेरी मुस्कान .

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तेरी मुस्कान.

बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे

बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे
वो लड़ती है , झगड़ती है ,
मनाने जाऊं तो रूठ जाती है,
फिर रुसवा होकर कहती है ,
मुझे नही है प्यार तूुझसे,
कोई एहमियत नही तेरी मेरे जीवन मे,
और मैं ;बस चुपचाप सुन लेता हूं,
की कैसे बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे |

वो हँसती है,
मुस्कुराती है,
फिर कभी कभी चुप बैठ जाती है,
जब पूछता हूं ; क्या हुआ ?
वो कहती है , कुछ नही,
वो समझती है झूठ बोलके सच छुपा लेगी मुझसे,
पर चेहरा बयान कर देता है उसका,
की बहुत सच्चाई से झूठ बोलती है वो मुझसे |

मैं जानता हूं कि वो जानती है,
की न वो चाँद है मेरे रात की
जो रात को ही साथ निभाये
न सूर्य है सहर का,
जो साँझ को ढल जाए,
वो तो आसमान है मेरा
जो जानती है कब है उजियारा मेरे जीवन मे,
और कब अंधेरा,
मैं फिर भी कहता हूँ बहुत बुरी है तू ज़िन्दगी
और मुस्कुरा के वो जवाब देती है
बहुत सचाई से झूठ बोल लेते हो तुम मुझसे।

बहुत सच्चाई से वो झूठ बोलती है मुझसे

चल अकेले,बन तू अपना हमसफ़र.

कौन देगा तेरा साथ ?

सबकी अलगअलग हैं राहें;

तू ही गिरेगा पथ पर,

तू ही थमेगा अपनी बाहें .

अंधेरों से वो डरें,

जिनको है प्रकाश की तलाश ,

तुझसे प्रज्वलित है चाँदसितारे ,

जिनसे रोशन है आकाश.

तू ही है रागिनी, तू ही सहर

चल अकेले , बन तू अपना हमसफ़र .

 

तेरे साहस का गीत , पवन गुनगुनायेगी;

तेरे क़दमों की गूंज से , धरा कांप जाएगी,

तेरे परिश्रम को देख कर ,

आसमाँ भी झुक देगा सर ,

चल अकेले , बन तू अपना हमसफ़र.

चल अकेले,बन तू अपना हमसफ़र.

कहाँ रहता है खुदा

 

जिस दिल में गूंजता है प्रेम का गीत ;
उस गीत का संगीत हूँ मैं .

गर समझता है खुद को तन्हा;
तो उसका भी मीत हूँ मैं ,

अन्धकार में प्रकाश ;
तो रात्रि का अंधकार हूँ मैं ,

बसंत में खिलती कलि ;
तो पतझड़ में गिरता फूल हूँ मैं ,

गर देखना चाहे मुझे ,
तो तुझमे ही हूँ मैं .

कहाँ रहता है खुदा

कौन है तू ?

तू चूर है गुरुर में
की आईने में दिखता अक्स है तू ,
जो जल के राख़ बन जाये ,
वो नहीं शख्स है तू .

तू तेज है सूरज का ,
और चाँद का नूर है ,
खुद खुदा ने तराशा जिसको ,
तू वही कोहिनूर है .

न सांसों का प्रवाह ,
न बहता रक्त है तू ,
बह रहा है प्रतिपल ,
वो सुहाना वक्त है तू .

पर्वतों के गुरुर जो
चीर के बनाये राह तू ,
जो थम सके कभी न ,
उस सरिता का प्रवाह है तू .

न करना तुलना किसी से ,
हर इंसान अलग है ,
खुदा की नज़्म है ये दुनिया ,
और लफ्ज़ है तू .

कौन है तू ?

इसी पल है ज़िन्दगी …

सभी खुशियां सभी गम ,
कभी धूप कभी छांव ,
कभी पतझड़ कभी सावन .
जीवन का हर रंग ,
जीवन का हर ढंग ,
देखना है ; जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

कल तो कभी देखा नहीं ,
कल तो कभी आया नहीं ,
गर कोई ख्वाइश है ,
गर कोई आज़माइश है ,
सभी अरमानो का अंत ,
सभी ख्वाईशो का प्रारम्भ ,
इसी पल है ; क्यूंकि इसी पल है ज़िन्दगी .

 

याद कर रहा बीती बातें ,
गुज़र रही इस पल की सौगातें,
कल यह भी बन जाएँगी यादें ,
इसलिए जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

इसी पल है ज़िन्दगी …

प्रेम

फूलों की सुगंध सा ; काँटों की चुभन सा ,

सूर्य के प्रकाश सा ; हवाओं की आवाज़ सा ,

गीत में संगीत सा , है मेरे स्वभाव सा प्रेम .

 

रिश्तों की बुनियाद यही हो ,

जहाँ जज़बात दिलों में हो ,

निर्दोष ,निरअहंकार, निर्भय दिल मे,

बस्ता है प्रेम .

 

सागर की लहरें है जितनी ,

फूलों पर फिरती है तितली,

जैसे झूमते है बादल गगन में,

उतना स्वतंत्र है प्रेम .

 

है भीग रहा संसार जिसमे ,

उस वर्षा का स्त्रोत है प्रेम.

प्रेम