कौन है तू ?

तू चूर है गुरुर में
की आईने में दिखता अक्स है तू ,
जो जल के राख़ बन जाये ,
वो नहीं शख्स है तू .

तू तेज है सूरज का ,
और चाँद का नूर है ,
खुद खुदा ने तराशा जिसको ,
तू वही कोहिनूर है .

न सांसों का प्रवाह ,
न बहता रक्त है तू ,
बह रहा है प्रतिपल ,
वो सुहाना वक्त है तू .

पर्वतों के गुरुर जो
चीर के बनाये राह तू ,
जो थम सके कभी न ,
उस सरिता का प्रवाह है तू .

न करना तुलना किसी से ,
हर इंसान अलग है ,
खुदा की नज़्म है ये दुनिया ,
और लफ्ज़ है तू .

कौन है तू ?

इसी पल है ज़िन्दगी …

सभी खुशियां सभी गम ,
कभी धूप कभी छांव ,
कभी पतझड़ कभी सावन .
जीवन का हर रंग ,
जीवन का हर ढंग ,
देखना है ; जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

कल तो कभी देखा नहीं ,
कल तो कभी आया नहीं ,
गर कोई ख्वाइश है ,
गर कोई आज़माइश है ,
सभी अरमानो का अंत ,
सभी ख्वाईशो का प्रारम्भ ,
इसी पल है ; क्यूंकि इसी पल है ज़िन्दगी .

 

याद कर रहा बीती बातें ,
गुज़र रही इस पल की सौगातें,
कल यह भी बन जाएँगी यादें ,
इसलिए जीवन जीना है ,
तो इसी पल है ज़िन्दगी .

इसी पल है ज़िन्दगी …

प्रेम

फूलों की सुगंध सा ; काँटों की चुभन सा ,

सूर्य के प्रकाश सा ; हवाओं की आवाज़ सा ,

गीत में संगीत सा , है मेरे स्वभाव सा प्रेम .

 

रिश्तों की बुनियाद यही हो ,

जहाँ जज़बात दिलों में हो ,

निर्दोष ,निरअहंकार, निर्भय दिल मे,

बस्ता है प्रेम .

 

सागर की लहरें है जितनी ,

फूलों पर फिरती है तितली,

जैसे झूमते है बादल गगन में,

उतना स्वतंत्र है प्रेम .

 

है भीग रहा संसार जिसमे ,

उस वर्षा का स्त्रोत है प्रेम.

प्रेम

माँ

वो इतनी खूबसूरत है ,

जैसे खुदा की मूरत है .

 

वो प्यार इतना बरसाती है ,

पूरी ज़िन्दगी भीग जाती है ,

 

वो खुशियों के सागर से ,

मोती चुन कर लाती है ,

 

जब दुआ का सावन आया ,

हर बूँद में उसी को पाया ,

 

जब पार करना था दुखों का सागर ,

हर पत्थर पर माँ लिखवाया .

माँ

तेरे करीब हूँ मैं …

रुसवा ना होना राहों से ;

गर अकेला है तू  ;

इन तन्हाइयों में ; इन खामोशियों में

तेरे करीब हूँ मैं.

 

मैं नहीं कहता की सरल होंगी राहें ,

पर जब भी गिरेगा तू ,

तुझे सँभालने ;

तेरे करीब हूँ मैं .

 

दुनिया की भीड़ में,

खो गया तू इस कद्र

कि मुझसे दूर हो जाये तू ,

तब भी ;

तेरे करीब हूँ मैं.

 

याद अपनों कि आएगी ,

इस से कोई गिला भी नहीं ,

पर ये ना भूलना तू ,

कि गैर तो मैं भी नहीं ,

गर कभी साथ छूठ जाये अपनों का ;

तब भी हाथ थामे ;

तेरे करीब हूँ मैं .

तेरे करीब हूँ मैं …

हर तस्वीर कुछ कहती है

किसी कलाकार की कला बनती है
किसी ख्वाब को कला बनाती है
कभी बीते हुए लम्हों को
तो कभी आने वाले पल दिखलाती है
हर तस्वीर कुछ कहती है

समय के सफ़र में
जो अपने छूट गए पीछे
आगे किसी राह पर गर न मिल सके
उनकी यादों को संभाले रखती है
हर तस्वीर कुछ कहती है

कभी खुशियों के दिन , कभी ग़मों की रात
कुछ सुहाने पल , कुछ अनछुई बात
जीवन के आरम्भ से ,जीवन के अंत तक
हर पल को संजोती है
हर तस्वीर कुछ कहती है

कभी किसी का गीत ,कभी किसी की बोली
कभी किसी की प्रीत ,कभी किसी की हमजोली
कभी बेरंग जिंदगी में रंग भर देती है
हर तस्वीर कुछ कहती है ।

हर तस्वीर कुछ कहती है

ये पल भी बीत जायेगा…

चांदनी रात में सागर किनारे ,

कोहीनूर से चमकते आसमान में तारे ,

देखकर जिनको दिल लहरों सा मचल जायेगा ,

बस सुबह तक रहेंगे ये नज़ारे ,

थोड़ा बेसब्र , थोड़ा सुकून देकर

ये पल भी बीत जायेगा .

 

लम्हों की बारिश में भीग जाओ यारों ,

न जाने कब ये सावन बीत जायेगा ,

थोड़ा हँसाकर, थोड़ा रुलाकर ,

ये पल भी बीत जायेगा .

 

टूटते तारों के इंतज़ार में ,

दिल की ख्वाइशें  अधूरी रह जाएँगी,

गर बढते रहे कदम तो ,

मंज़िल भी मिल जाएगी ,

थोड़ी सफलता , थोड़ी सबक सिखाकर ,

ये पल भी बीत जायेगा.

ये पल भी बीत जायेगा…