तेरी मुस्कान.

अश्कों से भीगी जिंदगी ,

पल भर में सूख जाती है ,

जब तू मुस्कुराती है.

 

लफ़्ज़ों के बिना भी ,

कह देती है हर दास्ताँ ,

कुछ ऐसी जुबान है तेरी मुस्कान.

 

था गुरुर चाँद को ,

की रोशन है उससे आसमान ,

अब  छुप गया  है ,

बादलों के पीछे ,

देख के तेरी मुस्कान .

 

बरसता सावन बुझा रहा है,

प्यास सारे जहाँ की ,

और प्यासे सावन पर,

बरस रही है तेरी मुस्कान .

 

जगमगाता है आसमान ,

जैसे सितारों   से ,

है यही दुआ खुदा से ,

सदा वैसी रहे तेरी मुस्कान .

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तेरी मुस्कान.

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