कहाँ रहता है खुदा

 

जिस दिल में गूंजता है प्रेम का गीत ;
उस गीत का संगीत हूँ मैं .

गर समझता है खुद को तन्हा;
तो उसका भी मीत हूँ मैं ,

अन्धकार में प्रकाश ;
तो रात्रि का अंधकार हूँ मैं ,

बसंत में खिलती कलि ;
तो पतझड़ में गिरता फूल हूँ मैं ,

गर देखना चाहे मुझे ,
तो तुझमे ही हूँ मैं .

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कहाँ रहता है खुदा

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