तेरे करीब हूँ मैं …

रुसवा ना होना राहों से ;

गर अकेला है तू  ;

इन तन्हाइयों में ; इन खामोशियों में

तेरे करीब हूँ मैं.

 

मैं नहीं कहता की सरल होंगी राहें ,

पर जब भी गिरेगा तू ,

तुझे सँभालने ;

तेरे करीब हूँ मैं .

 

दुनिया की भीड़ में,

खो गया तू इस कद्र

कि मुझसे दूर हो जाये तू ,

तब भी ;

तेरे करीब हूँ मैं.

 

याद अपनों कि आएगी ,

इस से कोई गिला भी नहीं ,

पर ये ना भूलना तू ,

कि गैर तो मैं भी नहीं ,

गर कभी साथ छूठ जाये अपनों का ;

तब भी हाथ थामे ;

तेरे करीब हूँ मैं .

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तेरे करीब हूँ मैं …

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