ये पल भी बीत जायेगा…

चांदनी रात में सागर किनारे ,

कोहीनूर से चमकते आसमान में तारे ,

देखकर जिनको दिल लहरों सा मचल जायेगा ,

बस सुबह तक रहेंगे ये नज़ारे ,

थोड़ा बेसब्र , थोड़ा सुकून देकर

ये पल भी बीत जायेगा .

 

लम्हों की बारिश में भीग जाओ यारों ,

न जाने कब ये सावन बीत जायेगा ,

थोड़ा हँसाकर, थोड़ा रुलाकर ,

ये पल भी बीत जायेगा .

 

टूटते तारों के इंतज़ार में ,

दिल की ख्वाइशें  अधूरी रह जाएँगी,

गर बढते रहे कदम तो ,

मंज़िल भी मिल जाएगी ,

थोड़ी सफलता , थोड़ी सबक सिखाकर ,

ये पल भी बीत जायेगा.

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